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छोटे दुकानदारों के लिए सरकार ने खोली नई ई-दुकान, बढ़ेगी Flipkart-Amazon की चुनौती!

ई-कॉमर्स सेगमेंट में Flipkart और Amazon जैसी बड़ी कंपनियों के दबदबे को चुनौती देने के लिए सरकार ने एक नई तरह की ई-दुकान ONDC खोली है. अभी इसे पायलट बेसिस पर शुरू किया गया है. जानें क्या है ये ONDC.

सरकार ने खोली नई ई-दुकान ONDC

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 अप्रैल 2022,
  • (अपडेटेड 30 अप्रैल 2022, 11:52 AM IST)
  • 5 शहरों में शुरू हुआ कॉमर्स प्लेटफॉर्म चुनना ONDC
  • अभी 150 रिटेलर्स ऑनबोर्ड

देश के ई-कॉमर्स बाजार में अभी Flipkart और Amazon का दबदबा है. इन प्लेटफॉर्म के छोटे दुकानदारों के साथ भेदभाव करने की कई शिकायतें मिलने के बाद अब सरकार ने एक नई तरह के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है. पायलट बेसिस पर शुरू की गई इस योजना को धीरे-धीरे सरकार देशभर में लागू करेगी.

UPI की तरह है ONDC
सरकार ने जो नया ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बनाया है, वो एक ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) है. ये बिलकुल डिजिटल पेमेंट के लिए तैयार किए गए UPI टाइप प्रोटोकॉल की तरह है. अभी इसे 5 शहरों में पायलट बेसिस पर शुरू किया गया है.

इस बारे में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ' यूपीआई के बाद, वाणिज्य क्षेत्र के लोकतांत्रिकरण का एक और गेम चेंजर आईडिया है ONDC.ये मंच ग्राहकों को सेलर और लॉजिस्टिक प्रोवाइडर्स चुनने की आजादी कॉमर्स प्लेटफॉर्म चुनना देगा. तो चॉइस, सुविधा और पारदर्शिता की नई दुनिया के लिए तैयार हो जाइए.'

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इन शहरों में शुरू हुआ ONDC
वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) में अतिरिक्त सचिव अनिल अग्रवाल ने जानकारी दी कि सरकार ने दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरू, कोयंबटूर, शिलॉन्ग और भोपाल में इस ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को पायलट बेसिस पर शुरू किया है. इन 5 शहरों के करीब 150 रिटेलर्स अभी ONDC से जुड़े हैं. अभी हम देखना चाहते हैं कि ये काम कैसा कर रहा है, जब आप सही में पेमेंट,ऑर्डर, ऑर्डर कैंसल और डिलीवरी कर रहे हैं. हमारे पास अच्छी खासी संख्या में रिटेलर्स और टेडर्स हैं. इन्हें प्लेटफॉर्म के साथ इंटीग्रेट किया जा रहा है. वहीं कई लॉजिस्टिक पार्टनर्स को भी इससे जोड़ा जा रहा है.

ऐसे काम करेगा ONDC
सरकार को अपना ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बनाने का ख्याल कोरोना महामारी के दौरान आया. इस पर दिसंबर 2021में काम शुरू हुआ. उस दौरान सरकार को कई लोगों तक आवश्यक वस्तुएं पहुंचाने में दिक्कत आ रही थी, इसी से सरकार को इस तरह का ओपन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बनाने का विचार आया. इससे देश में उन करोड़ों छोटे दुकानदारों को लाभ होगा, जो अभी तक ई-कॉमर्स इकोसिस्टम का हिस्सा नहीं बन पाए हैं.

ONDC, असल में एक तरह की ओपन रजिस्ट्री होगी. छोटे से छोटा दुकानदार अपने आप को इस पर रजिस्टर करा सकेगा. ये ई-कॉमर्स सेगमेंट में मानकीकरण लाने वाला होगा. इसका फायदा ये होगा कि किसी रिटेलर को ऑनलाइन मार्केट में सामान बेचने के लिए खुद के अलग-अलग ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर नहीं कराना होगा. ऐसे में अगर किसी ग्राहक को कुछ खरीदना होगा, तो वो अपने इलाके में इस ओपन रजिस्ट्री पर रजिस्टर रिटेलर को पहले चेक कर सकेगा. इतना ही नहीं ग्राहक को एक और फायदा कॉमर्स प्लेटफॉर्म चुनना ये होगा कि वह अपने ऑर्डर को अलग-अलग करके मंगा सकेगा, खुद से डिलीवरी के ऑप्शन को चुन सकेगा.

ऑनलाइन ले जाना चाहते हैं अपना कारोबार तो सही ई-कॉमर्स प्‍लेटफॉर्म कैसे चुनें? पढि़ए पूरी डिटेल

कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन कारोबार में कई गुना इजाफा हुआ है.

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लेनदेन और कारोबार के बदलते माहौल में ई-कॉमर्स उपभोक्‍ता और दुकानदार दोनों के लिए रीढ़ की तरह काम कर रहा है. इस प्‍लेटफॉ . अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated : April 13, 2022, 15:20 IST

नई दिल्‍ली. कोविड-19 महामारी ने सामाजिक दूरी के साथ ऑनलाइन कारोबार के महत्‍व को भी बखूबी समझाया है. वर्तमान में परचून से लेकर बड़े ब्रांड तक ऑनलाइन माध्‍यम से ही अपने कारोबार को नया आयाम दे रहे हैं. ऑनलाइन माध्‍यम से कारोबारी न सिर्फ ज्‍यादा से ज्‍यादा ग्राहकों तक पहुंच बना लेते हैं, बल्कि इससे व्‍यापार की परंपरागत चुनौतियां भी खत्‍म हो जाती हैं. ऐसे में अगर आप भी अपने कारोबार को ऑनलाइन ले जाने के बारे में सोच रहे हैं तो क्‍यूपे के सीईओ और को-फाउंडर मनीष कौशिक बता रहे कैसे सही ई-कॉमर्स प्‍लेटफॉर्म चुनना चाहिए.67

सबसे पहले लागत का लगाएं अनुमान
किसी ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म का मूल्यांकन करते समय लागत की गणना सबसे पहले करनी चाहिए. कारोबार चाहे छोटा और प्रारंभिक हो या ई-कॉमर्स में बदल रहा स्थापित व्‍यवसाय हो, इसमें रखरखाव, डोमेन और होस्टिंग, सोशल मीडिया विशेषज्ञ जो ब्रांड की ऑनलाइन उपस्थिति का प्रबंधन करेंगे, इनसे जुड़ी सभी लागत को ध्‍यान में रखना चाहिए. इसके अलावा ई-मेल और एसएमएस मार्केटिंग, एसईओ, डि‍लीवरी जैसे खर्चों को शामिल करना चाहिए.

मजबूत कैटलॉग से उठाएं फायदा
ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म के लिए एक सुंदर कैटलॉग तैयार करने के लिए बेहतर टूल्‍स और फीचर का इस्‍तेमाल करना चाहिए. इसमें सामान लेने और पहुंचाने की सुविधा व एक्‍सेल फाइल के जरिये सैकड़ों उत्‍पादों को अपलोड करने जैसी बारीकियों पर ध्‍यान देना चाहिए. इसके अलावा वेबसाइट की स्थिति जानने, ग्राहक के व्‍यवहार का विश्‍लेषण करने व स्‍टोर की पूरी जानकारी रखने जैसे काम करने चाहिए.

बिक्री के उतार-चढ़ाव पर नजर रखना
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को अपसेल/डाउनसेल का पूरा डाटा एकत्र करना चाहिए, ताकि कारोबार की रियल टाइम वास्‍तविक स्थिति का पता लगाया जा सके. इसके कॉमर्स प्लेटफॉर्म चुनना लिए कारोबारी को एक बेहतर ई-कॉमर्स प्‍लेटफॉर्म की मदद लेनी चाहिए जो उन्‍हें हर समय समस्‍या का समाधान कराने के लिए उपलब्‍ध हो. ऐसे प्‍लेटफॉर्म आपको अपना कारोबार बढ़ाने में भी खूब मदद करते हैं.

डिजिटल ऑर्डर लेने की सुविधा
कारोबारी को ऐसे ई-कॉमर्स प्‍लेटफॉर्म का चुनाव करना चाहिए जो टियर-3 और 4 जैसे छोटे शहरों में भी संपर्क बनाने और ऑर्डर लेने में सक्षम हों. ग्राहकों को किफायती कीमत पर उत्‍कृष्‍ट उत्‍पाद उपलब्‍ध कराया जाए, ताकि आपका कारोबार तेजी से आगे बढ़े. आपके पास किराना की दुकानों, रेस्‍तरां आदि से क्‍यूआर कोर्ड के जरिये ऑर्डर लेने की सुविधा भी होनी चाहिए.

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अमेजॉन और फ्लिपकार्ट तक को चुनौती दे रहा है सरकार का ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म

ई-पोर्टल जीईएम जिसका पूरा नाम गवर्नमेंट ई-मार्केट प्लेस है एक ऑनलाइन बाजार है, जिससे कोई भी व्यक्ति घर बैठे जुड़ सकता है और सरकार के साथ बिजनेस कर सकता है. जेम पोर्टल पर बीटूजी (बिजनेस टू गवर्नमेंट) कारोबार होता है. उद्यमियों से सिर्फ सरकार इस पोर्टल पर खरीदारी करती है.

अमेजॉन और फ्लिपकार्ट तक को चुनौती दे रहा है सरकार का ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म

पूरी दुनिया बदलाव के दौर से गुजर रही है. इस बदलाव के दौर में जो नई वैश्विक व्यवस्था आकार ले रही है उसमें ई-कॉमर्स का कारोबार बड़ी तेज गति से फैल रहा है. लिहाजा केंद्र सरकार ने भी 2016 में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (Government E-Markaetplace) नाम से एक सरकारी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बनाया. खास बात यह है कि मौजूदा वक्त में इस प्लेटफॉर्म पर 43 लाख से अधिक विक्रेता और सर्विस प्रोवाइडर मौजूद हैं, जो अब तक कॉमर्स प्लेटफॉर्म चुनना 2.48 लाख करोड़ रुपये का कारोबार कर चुके हैं. सरकार के आंकड़ों की मानें तो वित्त वर्ष 2021-22 के लिए जेईएम ने एक लाख करोड़ रुपये का ऑर्डर हासिल किया है. उपलब्धि इतनी बड़ी थी कि पीएम मोदी (PM Modi) भी फिदा हो गए और इस संबंध में ट्वीट करते हुए उन्होंने कहा कि जीईएम प्लेटफॉर्म विशेष रूप से एमएसएमई को सशक्त बना रहा है, जिसमें 57 फीसदी ऑर्डर मूल्य एमएसएमई क्षेत्र (MSME Sector) से आता है. प्रदर्शन के स्तर की बात करें तो सरकार का यह ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म आज की तारीख में मोस्ट पापुलर प्लेटफॉर्म अमेजॉन और फ्लिपकार्ट तक को चुनौती दे रहा है.

सरकार के इस आइडिया का अजब-गजब सफर

ई-पोर्टल जीईएम जिसका पूरा नाम गवर्नमेंट ई-मार्केट प्लेस है एक ऑनलाइन बाजार है, जिससे कोई भी व्यक्ति घर बैठे जुड़ सकता है और सरकार के साथ बिजनेस कर सकता है. जेम पोर्टल पर बीटूजी (बिजनेस टू गवर्नमेंट) कारोबार होता है. उद्यमियों से सिर्फ सरकार इस पोर्टल पर खरीदारी करती है. भारत में सरकार से बिजनेस करने का इतिहास कोई नया नहीं है. ब्रिटिश काल में भी इस तरह की व्यवस्था को डिजाइन किया गया था. आजादी के बाद यह काम 1951 में आपूर्ति और निपटान महानिदेशालय (डीजीएस एंड डी) करने लगा जिसके तहत 1960 में इंडिया स्टोर्स डिपार्टमेंट का गठन किया गया था.

1974 में एक बार फिर इसे पुनर्गठित किया गया, लेकिन सरकार इसमें कोई बड़ा सुधार नहीं ला पाई. ऐसा कहा जाता है कि दौरान सरकार में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार व्याप्त था और कुछ चुने हुए लोग उगाही भी करते थे. 2014 में जब सत्ता बदली तो कॉमर्स प्लेटफॉर्म चुनना सरकार ने इस दिशा में ध्यान देना शुरू किया कि आखिर किस तरह से सरकारी खरीद-बिक्री में पारदर्शिता लाई जाए और इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म किया जाए. सचिवों के दो समूहों ने ई-मार्केटप्लेस के लिए महत्त्वपूर्ण सिफारिश दी. हालांकि इस वन स्टॉप गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस को अमेजॉन या फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स साइट्स का क्लोन संस्करण कहा जाता है, लेकिन कुछ ही दिनों में सरकार के इस ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म (GeM) ने ऑनलाइन बाजार में तहलका मचा दिया है.

हैंडलूम वर्करों और हैंडीक्राफ्ट कारीगरों की हुई चांदी

इस पहल के अंतर्गत केंद्र सरकार का लक्ष्य करीब 35 लाख हैंडलूम वर्कर और 27 लाख हैंडीक्राफ्ट कारीगरों को बड़ा बाजार उपलब्ध कराना है ताकि वे आसानी से अपना माल बेच सकें. कहने का मतलब यह कि सरकार इस ई-पोर्टल के जरिये बिजनेस में बिचौलियों के खेल को खत्म करने की तरफ बढ़ रही है. साथ ही इससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी गति मिलेगी. खासबात यह है कि केंद्र सरकार का यह अभियान विभिन्न राज्यों में भी काफी लोकप्रिय हो रहा है. इसके तहत बुनकर और कारीगर अपने उत्पादों को सीधे सरकारी विभागों को बेच रहे हैं. इससे कारीगरों, बुनकरों, सूक्ष्म उद्यमियों, महिलाओं, आदिवासी उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों आदि विक्रेता समूहों की भागीदारी बढ़ रही है, जिन्हें अब तक सरकारी बाजारों तक पहुंचने में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता था. इसके लिए सरकार ने अपने सभी विभागों को जीईएम यानी गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस से जोड़ा हुआ है जहां छोटे बिजनेसमैन भी अपना सामान उचित कीमत पर बेच पा रहे हैं.

सफलता के झंडे गाड़ रहीं स्टार्टअप कंपनियां

यह पोर्टल पारदर्शिता एकीकृत भुगतान प्रणाली का दावा करता है. लिस्टिंग के मामले में यह तमाम लोकप्रिय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को टक्कर दे रहा है और लगातार उद्यमशीलता की सफलता की कहानियां गढ़ रहा है. खासतौर से नवोदित स्टार्टअप संस्थापकों ने जेम के स्टार्टअप रनवे पोर्टल के जरिये काफी कुछ हासिल किया है. जेम पोर्टल पर 13,000 से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हैं और सिर्फ स्टार्टअप कंपनियों ने 6,500 करोड़ का कारोबार किया है. वूमनिया पोर्टल की बात करें तो यह महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों का एक मंच है जिसपर कई तरह के उत्पाद मौजूद हैं. जेम पोर्टल के जरिये वूमनिया अच्छा कारोबार कर रही है.

जेम पोर्टल ने खरीद में लगभग 160 प्रतिशत की उछाल दर्ज की है. कई सर्वेक्षणों और रिपोर्टों की मानें तो अच्छी रेटिंग की वजह से जेम पोर्टल की विश्वसनीयता में जबरदस्त वृद्धि हुई है. हाल ही में जेम ने डाक सेवा और कॉमन सर्विस सेंटर के साथ भी करार किया है. इससे अब गांव के उद्यमी भी अपने सामान को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस पोर्टल पर बेच सकेंगे. कॉमन सर्विस सेंटर का चार लाख गांवों में अपना नेटवर्क है जिसका उपयोग ग्रामीण उद्यमियों को जेम पोर्टल पर सामान बेचने के लिए किया जाएगा. वहीं डाक विभाग ग्रामीण उद्यमियों के उत्पादों की ऑनलाइन डिलीवरी से लेकर उनके भुगतान तक का दायित्व निभाएगा.

क्या कहता है इकनोमिक सर्वे 2021-22

हाल में ही सामने आए एक सर्वे में कहा गया है कि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस पर करीब 10 ऐसे प्रोडक्ट है जो अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसे वेबसाइट की तुलना में कम कीमत पर ऑफर किए जा रहे हैं. देश में इस समय 25 से अधिक ई-कॉमर्स वेबसाइट हैं. इन सभी प्लेटफॉर्म पर ये प्रोडक्ट ज्यादा कीमत में मिल रहे हैं. खास बात यह है कि गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस ना सिर्फ कम कीमत में बढ़िया सामान बेच रहा है, बल्कि इसके प्रोडक्ट की गुणवत्ता भी काफी अच्छी है. साल 2021-22 के इकनोमिक सर्वे में भी इस बात का जिक्र किया गया है. सर्वे के दौरान कुल 22 प्रोडक्ट की अलग-अलग वेबसाइट पर मौजूद कीमत और क्वालिटी की तुलना की गई थी, जिसमें गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस पोर्टल पर मौजूद प्रोडक्ट की कीमत करीब 10 फीसदी तक कम थी.

ONDC Platform: बेंगलुरु में आम लोगों के लिए खुला ONDC, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को मिलेगी टक्कर

ONDC अब बेंगलुरु में आम लोगों के लिए खुल गया है. यह केन्द्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड की एक नई पहल है.

By: ABP Live | Updated at : 02 Oct 2022 04:36 PM (IST)कॉमर्स प्लेटफॉर्म चुनना

ONDC Platform India : केंद्र सरकार ने एक नई तरह के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म (E-Commerce Platform) ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (Open Network for Digital Commerce-ONDC) की शुरुआत बेंगलुरु में की गई है. ओएनडीसी अब बेंगलुरु में आम लोगों के लिए खुल गया है. यह केन्द्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड-डीपीआईआईटी (DPIIT) की एक नई पहल है.

पायलट प्रोजेक्ट
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2022 में ओएनडीसी को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लॉन्च किया था. बेंगलुरु के 16 पिन कोड क्षेत्रों के लिए ओएनडीसी खोल दिया गया है. इस नेटवर्क से पहले चरण के ट्रायल में 200 से अधिक ग्रोसरी स्टोर्स और रेस्टोरेंट्स को जोड़ दिया है. सूत्रों के अनुसार बेंगलुरु में यूजर्स को इस बीटा टेस्टिंग में नेटवर्क से एक साथ नहीं जोड़ा जाएगा, बल्कि इस काम को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा. अगले एक हफ्ते में इस नेटवर्क पर यूजर्स के लिए कोटक महिंद्रा बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के भी लाइव हो जाने की उम्मीद है.

सीमित यूजर्स का था नेटवर्क
ओएनडीसी के सीईओ और एमडी T Koshy का कहना हैं कि अब तक पायलट प्रोग्राम के तहत यह नेटवर्क कुछ चुने हुए यूजर्स तक सीमित था. बेंगलुरु में इसकी बीटा टेस्टिंग का लॉन्च इसे पूरी तरह से लागू करने की दिशा में बड़ा कदम है. हम यूजर्स से मिले फीडबैक के आधार पर इस नेटवर्क को और बेहतर बनाने की कोशिश करेंगे.

ऐसे करें इसका उपयोग
उन्होंने कहा कि नेटवर्क के लिए पूरी तरह से काम करने के लिए हमें थोड़ा इंतजार करना होगा. लेकिन, Star Trek के लोकप्रिय डायलॉग की तरह हम ऐसी जगह जा रहे हैं, जहां पहले कोई नहीं गया है. बेंगलुरू के इस ट्रायल में Paytm, MyStore और Spice Money को बायर साइड ऐप के तौर पर जोड़ा जाएगा. इससे इन ऐप पर साइन-अप करके यूजर्स इस नेटवर्क का उपयोग ऑर्डर प्लेस करने के लिए कर सकते हैं.

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चीजों को आसान बनाने पर फोकस
सेलर ऑनबोर्डिंग प्लेटफॉर्म सेलर ऐप के को-फाउंडर दिलीप वामनन (Co-founder of Seller Onboarding Platform SellerApp, Dilip Vamanan) का कहना हैं कि हमने बैक-एंड में चीजों को आसान बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है. पिछली रात हमने पाया कि हमारा सर्वर अमेरिका में है, जिसकी वजह से लेटेंसी बढ़ी है. इसलिए हमें सर्वर को इंडिया शिफ्ट करना होगा. इससे हमें लेटेंसी को 300 मिली सेकेंड्स से घटाकर 50 मिली सेकेंड्स तक लाने में मदद मिलेगी.

ये मर्चेंट्स जुड़े
आपको बता दे कि यह नेटवर्क 11 सेलर-साइड-ऐप्स का रोस्टर ग्रोसरी मर्चेंट्स, फूड एवं बेवरेज आउटलेट्स और कंज्यूमर पैकेंजिंग गुड्स (CPG) ब्रांड्स को होस्ट करेगा. इनमें यूनिलीवर्स यूशॉप, गोगल, सेलरऐप, ग्रोथफॉल्कंस, एनस्टोर और इनोबिट्स कई ब्रांड्स शामिल होंगे.

क्या है ONDC
आपको बता दे कि ओएनडीसी एक यूपीआई-प्रकार का प्रोटोकॉल है. इसका मकसद तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स क्षेत्र को दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचाना, छोटे खुदरा विक्रेताओं की मदद करना और फ्लिपकार्ट (Flipkart) और अमेजन (Amazon) जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों पर अंकुश लगाना है. इन दोनों का देश के ऑनलाइन खुदरा बाजार के 80 फीसदी हिस्से पर कब्जा है.

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Published at : 02 Oct 2022 04:36 PM (IST) Tags: E commerce ONDC E-Commerce ONDC Bengaluru ONDC Platform हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: Business News in Hindi

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